जन्मदिन पर भाभी ने दिया चूत के साथ अपनी गाँड़ का तोहफ़ा - Devar Bhabhi xxx

मस्त भाभी सेक्स कहानी में मैं भाभी को चोदता था. एक बार हम दोनों अकेले थे तो मैं चुदाई की आस में था पर भाभी ने पीरियड्स आने का बताया.

तब भी हमने सेक्स का कुछ मजा लिया.

दोस्तो, मैं मनु! मस्त भाभी सेक्स कहानी है इसी बीते दिसंबर की है

नानी की तबियत खराब है तो मां कुछ दिन पहले से ही नानी के घर गई.

और सर्दी बहुत ज्यादा अधिक पड़ने के कारण मैंने उनको वापस घर आने से रोक दिया ताकि आते टाइम उन्हें सर्दी ना लग जाए वे बीमार न हो जायें।

दोस्तो, मेरा जन्मदिन 18 दिसंबर को आता है कड़ाके की ठंड में!

मां नानी के घर गई थी 6 दिसंबर को.

मैंने सोचा मां तो गई अब कुछ दिन पूरा घर खाली रहेगा केवल मैं और मेरी मन्नत रानी होंगे घर में!

फिर तो पूरे रात दिन चुदायी का ऐसा रंगीन माहौल बनेगा की पूरे घर में, हर कमरे में, किचन में, बाथरूम में, छत पर, बालकनी में हर जगह बस मन्नत रानी की चूत और मेरे लंड का पानी ही मिलेगा गिरा हुआ।

वैसे तो मैं हमेशा अपनी झांटें और बगल के बाल साफ़ रखने लगा हूं पर मां को नानी के घर पहुंचाने के बाद मैंने घर आकर फिर से झांटों और बगल के बालों को जो बिल्कुल ही नहीं दिख रहे थे, शेव किया।

मन्नत की पसंद की ढेर सारी डेयरी मिल्क ले आया और न्यू बॉडी और स्प्रे रूम फ्रेशनर भी ले आया।

मैं तो फुल मूड में था कि घर में घुसते ही सबसे पहले मन्नत को घोड़ी बनाऊंगा और उनकी प्यारी सांवली सलोनी चूत में पच से थूक लगा कर लंड घुसा दूंगा.

लेकिन यहां तो साली किस्मत की ही मां चुदी पड़ी थी.

जैसे ही घर में आया, मन्नत रानी ने गेट खोला.

मैंने अंदर आते ही सीधे उनके होंठों को चूमने की कोशिश की बांहों में भर कर!

पर मन्नत रानी ने मना कर दिया- बेटू, प्लीज आज नहीं … मुझे लगता है पीरियड्स आने को हैं. और मुझे सर्दी भी लग गई है.

मैं– क्या हो गया जानू? सर्दी कैसे लग गई?

वैसे तो मेरे खड़े लंड पर धोखा होने के कारण मेरी झांटें सुलग जाती … पर क्या करें झांटें तो पहले ही साफ कर दी थी मैंने!

और पीरियड्स अभी कैसे? वो तो तुम्हें 12 तारीख को ही आते हैं ना?

मन्नत– बेटू जी, इस बार लगता है टाइमिंग गलत हो गई है. आई ऍम सॉरी बाबू! मैंने सोचा था आपको खुश करूंगी, आपकी रण्डी बन के रहूंगी जब तक मम्मी नहीं आती! पर ये तो साली तबीयत ने ही दगा दे दिया।

वैसे आप चाहो तो कर लो चुदायी! पर मैं ठीक नहीं हूं सॉरी।

मैं अब क्या ही कर सकता था, मन मारकर अपने रूम में गया और लेट गया.

थोड़ी देर में मन्नत मेरे कमरे में आई और मेरे साथ लेट गई।

हम दोनों चुप थे, रात होने लगी थी.

मन्नत ने सफ़ेद टीशर्ट और पजामी पहनी थी.

रूम हीटर ऑन था.

कमरे में सर्दी भी कम थी इसलिए मैं रजाई में बस फ्रेंची और हाफ स्लीव टीशर्ट पहने हुए लेटा था।

मन्नत– बेबी, नाराज हो क्या?

मैं– हम्मम, आपने तो मेरे सारे अरमानों पर मूत ही दिया!

मन्नत– ऐसे नहीं बोलो बाबू, मैं तो आपकी ही हूं ना! और वैसे भी सैंकड़ों बार तो मुझे चोद चुके हो. और आपने तो अब मेरी चूत को चूत नहीं भोसड़ा बना दिया है. अब इसमें क्या ही मिलेगा आपको!

मैं– आप मेरी हाफ वाइफ हो, आपकी चूत की सेवा करना मेरा धर्म है. अब ये चाहे चूत रहे या भोसड़ा बने, मुझे तो बस आपकी चूत ही प्यारी लगती है।

इस बात पर मन्नत खिलखिला कर हंस दी.

खैर इन बातों से तो मेरे लंड में तनाव आना तो लाजमी था.

ऊपर से भाभी ने मेरे पेट पर हाथ रख के सहलाना भी चालू कर दिया था।

मेरा लंड फ्रैंची से बाहर आने को मचलने लगा था.

मैंने बेड के दूसरे साइड में लेटे अपनी भतीजे को चिकोटी काट ली हल्के से!

वह जाग गया और रोने लगा.

भाभी बच्चे को चुप कराने में लग गई और टीशर्ट ऊपर कर के स्तन बाहर निकाल लिया.

क्या अद्भुत नजारा लगता है जब कोई माल अपनी चूचियों को ऐसे पिलाए!

उफ़ … मेरा लंड तो अब बेकाबू होने लगा था.

मैं उठा और भाभी का हाथ पकड़ के लंड पर रख दिया.

भाभी– पागल हो क्या यार? देख रहे बच्चा रो रहा है. ऊपर से पीरियड्स हैं. फिर तबीयत भी खराब है. और तुम हो कि बस चूत मारने के चक्कर में ही रहते हो, क्या मुझे मार डालना चाहते हो?

मुझे भाभी की यह बात बुरी लग गई और मेरी आंखों में आंसू आ गए.

मैं बेड की दूसरी तरफ मुंह कर के सो गया।

अगली सुबह मन्नत मेरे लिए रोज की तरह आज भी अपने दूध से बनी चाय लेकर आई और बेड पर बैठ कर मेरा सर सहलाते हुए मेरे गाल पर किस किया और जगाने लगी.पर मेरा मूड ठीक नहीं था तो मैंने उनका हाथ झटक दिया.

मन्नत उठी और सीधे रजाई में आ गई.

फिर मेरी फ्रेंची को साइड किया और मेरे सोए लंड पर एक किस किया और ‘सॉरी जानू’ बोली.

उसने फिर लंड के खाल को नीचे किया और मुंह में लेकर चूसने लगी.

मैं चुपचाप लेटा था लेकिन लंड अब जगने लगा था.

मन्नत ने अपने जीभ के जादू से लंड को जगाना चालू किया.

लंड ने जैसे ही थोड़ी गर्मी बनाई और अंगड़ाई ली, अचानक मन्नत उठी और मेरे पास आ कस मेरे मुंह में अपना जीभ ठेल दिया.

मैंने मन्नत रानी के जीभ को पीना शुरू किया.

कभी वो तो कभी मैं एक दूसरे के जीभ और होंठों को चूसने लगे।

मेरा लंड अब उफान पर था.

तभी मन्नत ने किसिंग बंद की और बोली– मनु बाबू, आप मेरे दूसरे पति हो, आपको मेरी परेशानी समझनी होगी. मेरी तबीयत ठीक नहीं है.

मैं– मन्नत, तुम जानती हो कि मुझे तुम्हारा नशा है. और इसके बिना मेरा जीना मुश्किल है. प्लीज कैसे भी लंड को शांत करो।

पर मन्नत ने हल्के से एक चपत लगाई मुझे और कहा- अब तुम बड़े हो, थोड़ा कंट्रोल करना सीखो।

फिर मेरे सामने ही उसने आज पहली बार अपनी टीशर्ट उठा कर कप में रखी चाय में अपनी चूची से दूध निचोड़ कर डाला और मुझे पीने को दिया।

मैं तो पागल हो रहा था … पर मैं क्या करता, आज तो चुदायी असम्भव थी।

जैसे तैसे दिन कटा.

शाम को मैंने खाना बाहर से मंगा लिया.

खाना खाने के बाद फिर वही सब!

मन्नत मेरे साथ ही सोई और जब तक जगती रही मेरी हालत खराब करती रही.

खैर हम दोनों सो गए थे, बाबू भी बेड बगल में ही पालने में सोया था.

रात को अचानक मेरी आंख खुली.

मैं क्या देखता हूं कि मन्नत अपने हाथों में लंड को पकड़े हुए सोई थी और मेरे लंड पर उसके होंठों की लिपस्टिक लगी हुई थी.

ये सब देख कर मेरा लंड गनगना उठा.

मन्नत मेरी तरफ मुंह करके सोई थी.

मैंने धीरे से उसके शर्ट के बटन खोले और उसके एक दूध से भरे चूची को मुंह में लेकर पीने लगा आंख बंद करके!

1 मिनट भी नहीं हुआ होगा, वह कसमसाने लगी.

उसने आंखें खोली, मुझे देखा, मैंने उसको देखा.

हम दोनों ने एक दूसरे को स्माइल दी और फिर इसी हालत में वह आंख बंद कर सोने में लग गई.

और मैं चूची का दूध पीने में लग गया।

मेरा लंड अब बेकाबू हो रहा था.

उधर मन्नत भी गर्म होने लगी थी.

हम दोनों ने एक दूसरे को कस के बांहों में जकड़ लिया था.

वह मेरा मुंह चूचियों पर जोर से दबाती जा रही थी.

थोड़ी देर में मैंने चूचियों को पीना छोड़ कर मन्नत रानी को चूमना शुरू कर दिया.

अब मन्नत भी कंट्रोल से बाहर थी.

उसने मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मारना चालू किया.

मैं– प्लीज कुछ करो, अब मुझसे नहीं रुका जा रहा. मैं भूल जाऊंगा कि तुम पीरियड्स में हो और तुम्हारी चूत चोद डालूंगा. वरना कुछ करो!

मन्नत ने कुछ बोला नहीं … बस उठी, अपने खुले बालों का जुड़ा बनाया और मेरे लंड के सुपारे के किस करके, चूस कर पूरा लंड मुंह में निगल लिया.

आह … क्या मजा आया था मुझे … ऐसा लगा पहली बार किसी हसीना ने मेरे लंड को यह सुख दिया हो!

फिर मन्नत ने अपनी एक उंगली मेरे मुंह डाली.

मैं उसकी पतली और लंबी उंगली को लंड की तरह चूसने लगा.

उधर वह मेरे लंड पर भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ी थी.

कभी लंड तो कभी आंड को चूसे चाटे जा रही थी.

फिर अचानक से एक जादू हुआ.

मन्नत ने उंगली मेरे मुंह से निकाला और बिना कुछ कहे सीधे मेरी गांड में पेल दी.

उफ्फ … क्या बताऊं … क्या फील हुआ मुझे!

ऐसा लगा काश यह काम वह मेरे साथ हर बार करे!

अब जितनी तेज वह मेरे लंड को चूस रही थी, उतने तेज ही मेरी गांड में उंगली से चोद भी रही थी.

इतनी जादूगरी ज्यादा देर झेलना मेरे बस में नहीं था.

दो मिनट में ही मैं बेचैन हो उठा, मैंने मन्नत का सिर पकड़ा और लंड पर दबा दिया.

मन्नत ने अपने मुंह में मेरे लंड को ऐसे जकड़ के चूसा कि तुरंत ही मैं छुट गया.

मेरे लंड ने सारा लावा मेरी जान के मुंह में निकाल दिया.

मन्नत रानी अभी भी लंड चूस रही थी और गांड में उंगली चला रही थी.

करीब दो मिनट बाद उसने मेरा लंड छोड़ा, गांड से उंगली निकाली और इशारे से मुझे मुंह खोलने को बोला.

मैंने मुंह खोला.

मन्नत ने जो उंगली मेरी गांड में घुसाई थी वही उंगली मेरे होंठों पर रख दी.

एक अजीब सी बदबू ने मेरे नाक को फाड़ दिया.

मैं कुछ कह पाता, तब तक उसने अपने मुंह में रखे हुए मेरे लंड के पानी को उंगली पर गिराया. जो उंगली से होते मेरे मुंह में जाने लगा.

पूरा मुंह खाली करने के बाद मन्नत बोली– उंगली को चाट कर साफ करो!

मैं उसकी आंखों में जैसे खो सा गया था … उसे देखते हुए मैं अपनी गांड के गंद से सनी उंगली को चाटने लगा.

फिर मन्नत ने मेरे मुंह से उंगली निकाली और अपनी जीभ मेरे मुंह में दे दी.

अब हम दोनों के मुंह में मेरे लंड का पानी था जो कभी उसके तो कभी मेरे मुंह में घुल रहा था और हम दोनों पी रहे थे।

मैं जोर लगा कर मन्नत की चूचियों को भींच रहा था.

करीब 5 मिनट बाद मन्नत का शरीर थरथराने लगा और वह हाम्फने लगी।

फिर वह मेरे ऊपर ही आंख बंद करके लेट गई.

शायद मेरी जान की चूत ने भी कामरस उगल दिया था.

मस्त भाभी सेक्स का मजा लाकर शांत हो गई थी।

अब अगले दिन:

सुबह मैं जब जगा तो मन्नत साफ सफाई में बिजी थी.

मैंने उसको पीछे से जाकर गले लगाया.

मैं पूरा नंगा ही था, सर्दी बहुत ज्यादा थी.

मन्नत– पागल हो क्या? इतनी सर्दी में नंगे घूम रहे हो मेरे बालम! क्या चाहते हो कि मेरी तरह तुम भी बीमार पड़ जाओ. रात को जो हुआ, उसके कारण ही मेरी और ज्यादा तबीयत खराब लग रही है शायद! मैंने दवाई तो खा ली है पर मन अभी भी ठीक नहीं!

मैं– तो ये साफ सफाई छोड़ो, आराम करो. मैं कर लूंगा ये सब. मैं आग जलाता हूं, तुम सेंक लेना, और हां खाना भी मत बनाओ, मैं बाजार से कुछ ले आऊंगा।

मन्नत कमरे में चली गई, शाम तक सोती रही दोपहर को खा पीकर!

फिर रात को भी मैंने ही रोटियां सेंकी, दोनों ने खाई, वो भी सिर्फ दूध और गुड़ के साथ!

और फिर एक दूसरे को बांहों में भर के सो गए।

अगले दिन मन्नत की तबीयत कुछ ठीक थी, मैं किसी काम से घर से बाहर को गया था.

मन्नत अकेली थी बाबू के साथ!

मैं शाम को देर से आया करीब 7 बजे.

मैंने जल्दी जल्दी खाना खाया मन्नत को भी खिलाया.

खाना आज भी बाहर से लाए था मैं!

फिर हम दोनों सो गए।

आज मन्नत अपने कमरे में सोई, मैं अपने कमरे में!

रात के ठीक बारह बजे मुझे तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम पर हैप्पी बर्थडे का जिंगल सुनाई दिया.

मैं हड़बड़ा कर उठ बैठा.

उठते ही जो नजारा दिखा … उफ़ .. वो तो मेरे लिए किसी जन्नत में हूरों को देखने से कम ना था.

नाइट बल्ब की मद्धम रोशनी … सिल्क की हल्की पिंक झीनी साड़ी में लिपटी एक हसीना जिसने साड़ी के नीचे ना कोई पेटीकोट बांधा था ना ऊपर ब्लाउज … गीले बाल मदमस्त और करने वाली खुश्बू!

मन्नत ने साड़ी ऐसे बांधी थी जैसे सिर्फ एक लेयर हो.

और उसके अंदर से झांकते ब्रा में कैद दो कठोर उन्मुक्त होश उड़ाने वाले चूचे … चूत की हल्की सी झलक!

आह्ह … मुझे लगा जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूं।

तभी अचानक कमरे की लाइट ऑन हुई और म्यूजिक बंद हुआ, फिर एलईडी की सफेद झकझक रोशनी में नजर आई एक खूबसूरत मल्लिका–ए–हुस्न जिसके हाथ में थी केक सजी ट्रे!

मन्नत इठलाती हुई मेरे कमरे में भीतर दाखिल हुई और मेरी रजाई खींच कर फेंक दी.

मैं उठ कर बैठा हुआ केवल मन्नत को एकटक देखे जा रहा था.

वह बेड पर आकर खड़ी हो गई और अपनी एक टांग उठाकर मेरे सीने पर रखी.

फिर मन्नत बोली– हैप्पी बर्थडे राजा … तुम्हें तुम्हारी हर खुशी मिले … अब उठ जाओ बेबी! और मुंह धो लो!

मैं उठने को हुआ.

तब तक मन्नत ने अपने पैर से हल्के से मुझे पुश किया और मेरा सिर पीछे को झुकाया.

मन्नत– कहां जा रहे हो उठ के?

मैं– मुंह धोकर आता हूं!

मन्नत– अच्छा राजा, अब तुम मुंह धोने जाओगे और मेरा टाइम खराब करोगे.

इतना बोल कर मन्नत ने केक बेड पर रखा और मेरे सिर के दोनों तरफ अपनी दोनों टांगें खोल कर खड़ी हो गई, नीचे झुक कर धीरे धीरे अपनी साड़ी को ऊपर उठाया और फिर मेरे मुंह पर अपनी चूत रख दी.

इस अचानक हुए हमले के लिए मैं तैयार नहीं था इसलिए कुछ पल को मैं समझ ही नहीं पाया.

मेरे नाक में मन्नत की चूत की कसैली सी महक समाने लगी.

ऐसे तो यह महक किसी को शायद अच्छी ना लगे लेकिन जिसने एक बार चूत चाट ली, उसके लिए ये महक किसी वायग्रा से कम नहीं।

मन्नत– क्या सोच रहे हो राजा? मुंह नहीं धोना क्या? चलो अब जल्दी से मुंह खोलो!

मैंने अपना मुंह खोल दिया और मन्नत रानी की महकती हुई चूत को अपने मुंह में भरने की कोशिश करने लगा.

फिर मन्नत रानी ने अपनी चूत की मुख से गर्म पानी की धार मेरे मुंह में छोड़ दिया जो सीधे मेरे कंठ से टकराई.

आह … क्या फीलिंग थी उस समय! वह शब्दो में बयां होने से रही!

कुछ देर मेरे मुंह में मूतने के बाद मन्नत ने कहा– राजा जी, अब चलिए अच्छे से कुल्ला कर लीजिए आप! फिर मैं आपको और गर्म पानी पिलाती हूं.

मैंने उठ कर मुंह में बचा खुचा मूत से गरारा किया और उसे खिड़की से बाहर थूका और फिर बेड पर आया.

इधर मन्नत ने इतने में मेरे बेड के नीचे से एक पानी का जग निकाला और बोली– पानी पियेंगे आप?

मैं– हम्मम!

मन्नत ने जग से पानी एक ग्लास में निकाल कर दिया.

मैं उसे पीने ही वाला था कि मेरा सर एक बेहद तीखी गंध से भन्ना गया.

ये जो मुझे मिला था पीने के पानी के नाम पर … यह पानी नहीं था … यह था पेशाब … वो भी शायद सुबह से जमा किया हुआ!

मैं कुछ बोलता …. उसके पहले मन्नत ने मेरा हाथ पकड़ा और ग्लास मेरे होंठ से लगा दिया और आंखों से इशारा किया पीने को!

मैं जैसे तैसे वो पीने लगा.

आधा ग्लास खत्म हुआ था, तब तक मन्नत रानी ने वो ग्लास अपने होंठों से लगा लिया और सारा मूत गटक गई।

आज मन्नत का यह रूप देख कर मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि इसे हो क्या गया है.

लेकिन उसकी इन हरकतों से मेरे लंड का पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था और मैं बेकाबू हो रहा था.

मैंने मन्नत को किस करना चाहा तो उसने मुझे रोक दिया.

खैर मन्नत ने केक उठाया और मेरे सामने रकही मोमबत्ती जलाई, जिंगल गाए, मैंने मोमबत्ती बुझाई.

अब केक काटने की बारी थी.

पर मन्नत चाकू तो लायी ही ना थी।

मैं– चाकू कहां गया बेटू?

मन्नत– यहीं है!

ऐसा बोलकर मन्नत ने मेरी चड्डी में हाथ घुसाया और मेरा फनफनाया हुआ लंड बाहर निकाला और बोली- इस चाकू ने तो ना जाने कितनी बार मेरा दिल और चूत चीरी है. क्या यह केक नहीं काट सकता!

मैंने अपना लंड केक पर रखा जैसे चूत में आहिस्ता से लंड को पिरोया जाता है वैसे ही केक में लंड को घुसा दिया.

मन्नत उठी और मेरे लंड को बिना हाथ से छुए सीधे पूरा मुंह में भर लिया और उस ऊपर लगे केक को खाने लगी.

मैं– मुझे भी खिलाओ यार!

उसने मेरा लंड चाट चाट कर साफ किया और फिर उठी साड़ी निकाली और चुपचाप ढेर सारा केक उठाकर अपनी गांड की दरार और चूत में भर लिया.

फिर वह कुतिया बन कर खड़ी हो गई.

मैं इशारा समझ गया और धीरे धीरे उसकी गांड चाटने लगा.

ऐसा जन्मदिन ऊपर वाला सबको दे!

गांड चाटने के बाद मैं रानी की चूत भी चाट कर केक खाने लगा.

अब तक की इन हरकतों ने मन्नत की चूत और मेरे लंड की हालत बिगाड़ दी थी.

मैं कुछ बोला नहीं, चुपचाप उठा और सीधे एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी भाभी मन्नत ‘द हाफ वाइफ’ की चूत में घुसा दिया.

चूंकि केक लगा ही था चूत में तो चिकनाई भरपूर थी जिसके कारण एक ही झटके में मन्नत की चूत को चीरते हुए लंड अपने मुकाम तक पहुंच गया.

इस अप्रत्याशित हमले के लिए मन्नत तैयार ना थी, वह बुरी तरह से कांप गई!

मैं बोला– बर्दाश्त के बाहर हो रहा था ये सब मुझसे अब! इसलिए बिना पूछे ही पेल दिया. सॉरी!

मन्नत– जब पेल ही दिया तो काहे की सॉरी!

मैं लगा धकापेल मन्नत की गर्म चूत को चोदने … पर आज उसकी इन अदाओं ने मुझे ज्यादा देर चोदने नहीं दिया, 3-4 मिनट ही हुए होंगे कि मैं चरम पर पहुंचने लगा.

तो मैं बोला– जान, मेरा छुटने वाला है.

मन्नत ने फटाक से लंड को चूत से खीच कर बाहर निकाला और बचे हुए केक के ऊपर मुठ मार कर सारा माल निकाल दिया.

मन्नत– लो केक खाओ … नई प्योर मलाई डाली है इस पर!

मैंने केक लेकर मुंह में रखा ही था, तब तक मन्नत ने केक पर गिरे मेरे वीर्य को कुत्ते की तरह जीभ से चाटना शुरू किया. सारा रस मुंह में लेकर वह मुझे किस करने लगी.

फिर हम दोनों ही केक के साथ मेरा मुठ का स्वाद भी एंजॉय करने लगे।

थोड़ी देर में जब मुंह का केक खत्म हुआ तब मैंने पूछा- पीरियड्स कब खत्म हुए?

मन्नत हंसती हुई– आये ही कब थे?

मैं– तीन दिन से तो था ही … और तबीयत भी खराब थी ना तुम्हारी!

मन्नत– वो तो तुम्हें सताने के लिए!

मैं– साली रांड, यह क्या मजाक था बहन की लौड़ी? जो तीन दिन से परेशान किए थी मुझे! ऊपर से रोज रात को आकर मेरे लंड को भड़काती भी थी.

मन्नत– मेरे पति के भाई जी, मेरे बाप के सौतेले दामाद जी, मेरी बहन के दूसरे जीजा जी, अगर मैं ना सताती तो आज की रात इतनी हसीन कैसे बनाती? आप तो बस आज देखते जाओ, आपके लिए बहुत कुछ खास है गिफ्ट में!

मैं– ओह्ह ऐसा है फिर तो ठीक है. वरना तो मैं तुम्हारी प्यारी छोटी बहन पूजा को ही चोदने का मन बना रहा था. सोच रहा हूं भाभी इतनी प्यारी और मस्त चुदक्कड़ हैं तो इनकी कुंवारी बहन की चूत भी तो कुछ कम ना होगी.

मन्नत– साले मादरचोद … मेरी बहन पर भी नजर रखे है तू? उसे भी अपनी रखैल बनायेगा क्या रे? क्या चाहता है मेरी बहन ही मेरी सौतन बन जाए?

मैं– ना ना जानू, तेरी सौतन नहीं, तेरी बहन ही रहेगी. वो बस चोदूंगा तुम दोनों को एक ही साथ! क्योंकि तूने जो मुझे 3 दिन परेशान किया उसकी सजा भी तो मिलनी चाहिए तुझे!

और हम दोनों गले लग के हंस दिए.

भाभी ने कान में कहा– आई लव यू देवर जी. आप ना होते तो मैं शायद हमेशा ही जिस्म की आग और सच्चे प्यार को तरसती. थैंक्स मेरी जिंदगी में आने और मुझे समझने और संभालने को, आज की चुदाई आपको जिंदगी भर याद रहेगी।

मैं– आई लव यू टू मन्नत रानी. आपने मुझे अपना पति मान लिया और मुझे इतना प्यार दिया, इसके लिए मैं हमेशा आपकी गुलामी करूंगा।

“सुनो, आज मेरे राजा के लिए एक सरप्राइज़ है. देखना चाहोगे?” मन्नत ने पूछा.

मैं– क्यों नहीं … आज तो एक से बढ़कर एक सरप्राइज़ मिल रहा.

मन्नत ने अपने दुपट्टे से मेरी आंखें बांध दी, मेरे होंठों पर रसीला किस किया और फिर मेरे हाथ भी बांध दिए.

मैं बस सोच रहा था कि क्या होने वाला है आगे!

फिर मेरे लंड के टोपे पर ढेर सारा केक का क्रीम लगता हुआ महसूस हुआ मुझे!

उसके बाद मन्नत ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और धीरे से उसके ऊपर सवार होने लगी.

उफ्फ … इतनी कसावट इतना टाइट छेद … हम्फ़ …

ये कैसे?

मन्नत की चूत तो मैंने खोल दी है.

फिर यह आज इतनी टाइट कैसे हुई है?

मन्नत ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा और एक झटका दिया कमर का … ऐसा लगा मेरा लंड चिर गया हो … मुझे तेज दर्द हुआ.

पर मन्नत के मुंह से कोई आवाज नहीं आ रही थी.

मैं दर्द से उभर पाता … तब तक एक बार और तेज झटका लगा और पूरा लंड भीतर घुस गया.

फिर दो कांपते होंठ मेरे होंठों से टकराए और मैं उनके रस को पीते हुए दर्द को भूलने की कोशिश करने लगा.

मन्नत– दर्द हुआ क्या जान?

मैं– हां. पर अब ठीक है. लेकिन तुम्हारी चूत इतनी टाइट कैसे हो गई?

मन्नत ने कुछ कहा नहीं, बस मेरा हाथ खोल दिया. और फिर मेरी आंख से पट्टी भी हटा दी.

अब जो था … वो था सरप्राईज!

मेरी ख्वाहिश आज पूरी हो गई थी.

जो हर रोज चुदाई करते हुए मैं मन्नत से बोलता था.

आज वो बिना बोले होने लगा था.

हुआ यूं कि मन्नत ने लंड चूत में नहीं अपनी कोरी वर्जिन गांड में डाला था … वो भी अपने हाथ से पकड़ कर!

मैंने देखा मन्नत की आंखें लाल हो गई थी और आंसू और दर्द की पीड़ा उसके चेहरे पर छलक आई थी.

लेकिन एक संतुष्टि का भाव भी था कि उसने मेरी चाहत पूरी करी थी.

मैंने हल्के से उसे ऊपर उठाया तो देखा नीचे लंड पर खून लगा था जो मन्नत रानी की गांड फटने की कहानी बयां कर रहा था।

मेरी आंखों में आंसू आ गए और मुझे मेरी प्रेमिका पर गर्व की अनुभूति हुई.

मैंने तुरंत ही मन्नत को सीने से लगाया और प्यार से सहलाने लगा, कभी गले, कभी कान, कभी कंधे, कभी गाल को चाटने लगा.

धीरे धीरे हम दोनों का ही दर्द कम होने लगा.

मन्नत अपनी कमर हिलाने की कोशिश करने लगी.

मैं इशारा समझकर अपनी बाहों के घेरे को ढीला किया और नीचे से धीरे धीरे उसकी गांड में लंड को पेलने लगा.

अब करीब 5 मिनट हो चुके थे, मैं मन्नत की चुचियों को मसलते हुए स्पीड बढ़ाने लगा.

कमरे में थप थप थप थप की आवाज गूंजने लगी.

साथ ही मन्नत और मेरी कामुक सिसकारियां भी निकलने लगीं.

हर धक्के पर मन्नत ‘आह आह राजा … पेलो मेरी गांड को … उफ़ राजा, तुम ही मेरे असली पति हो. मेरे जान बेटू … अपनी बीवी की गांड फाड़ दो. तुम्हारे लिए ही कोरी गांड बचा कर रखी थी.

इधर मैं भी उसके हर सवाल का जवाब और तेज धक्के के साथ दे रहा था.

अब गांड में पर्याप्त जगह बन गई थी, मैंने उसे सीधे लिटाया और दोनों टांग उठा कर अपने कंधे पर रखा, फिर लंड को एक ही धक्के में पूरा गांड में घुसेड़ दिया.

मन्नत– आराम से कीजिए जानू, आपकी ही हूं!

मैं– बहनचोद ये तेरी गिफ्ट तो मेरी है, मैं जैसे चाहूं खेलूंगा.

मन्नत– तुम मुझे बहन चोद क्यों बोलते हो? क्या मेरी बहन को चोदने का भी इरादा है?

मैं– हां बेबी हां … तुमसे पहले तो तुम्हारी बहन को देख कर ही मुठ मारी है मैंने! कैसे भी … एक बार उसकी चूत भी चाहिए ही मुझे!

मन्नत– उफ्फ बेबी … कितने हरामी हो तुम. मेरी बहन चोदने का प्लान मुझसे ही बता रहे हो!

मैं– तुम्ही से तो बताऊंगा. तभी तो तुम मेरे लिए उसे तैयार करोगी. मेरे अगले जन्मदिन पर मुझे पूजा मेरे नीचे चाहिए! इसके लिए तुम्हें जो करना हो, करो.

मन्नत– क्या तुम सच में ऐसा चाहते हो?

मैं– हां!

“उफ्फ आआ आह … और तेज पेल मादरचोद … रण्डी की औलाद … भड़वे, मेरी बहन पर गंदी नजर रखता है साले? तेरी आंख नोच लूंगी, तेरा लंड तोड़ दूंगी.”

ऐसे ही गंदी गालियां से मुझे उकसाते हुए चुदने लगी मन्नत!

मैं भी उसे उसके बहन के नाम से पुकारने लगा- ओह हह पूजा मेरी जान, देख तेरी बहन कैसे मुझे गालियां दे रही है. जब मैं तुझे याद करके इसे पेल रहा हूं. पूजा तू मुझसे चुदेगी ना, अपनी दीदी की सौतन बनेगी ना?

मन्नत पूजा की तरफ से बोलने लगी- हां जीजू, मैं आपकी हर ख्वाहिश पूरी करूंगी, अपनी दीदी की सौतन बनूंगी!

करीब 15 मिनट गांड चुदाई और भद्दी गालियों ने काम किया और मन्नत की चूत भलभला कर बहने लगी.

मैं करीब 5 मिनट और डटा रहा उसकी गांड में! मैं अब उसे पूजा कह के बुला रहा था और उसकी गांड में धक्के लगा रहा था.

वह मुझे चपत लगाते हुए बेशर्म बोल रही थी.

मेरा लावा फूटने वाला था, मैंने पूछा- कहां निकालूं माल?

मन्नत– पूजा के भोसड़े में!

इस बात ने मेरा सब्र तोड़ दिया और मैं मन्नत की गांड में ही छूट गया.

मैं मन्नत को किस करते हुए झड़ गया.

फिर थोड़ी देर मैं उसके ऊपर ही पड़ा रहा.

गांड में लंड खुद ही मुरझाने लगा और बाहर निकल आया.

मैंने देखा गांड से मलाई की नदी बह रही थी जो खून मिलने से हल्की गुलाबी हुई थी.

मन्नत– इसे साफ कर दो, मुझसे हिला भी नहीं जा रहा!

मैंने अपनी टीशर्ट से उसकी मस्त गांड साफ की, गांड की तो हालत खराब थी. छेद दस के सिक्के के साइज में खुल गया था.

फटने के कारण लाल निशान हो गए थे गोलाई में!

तब मैंने फोन में मस्त गांड न्यू छेद की फोटो ली और उसे मन्नत को दिखाया.

वह शर्मा कर मेरे सीने से लग गई।

अब हम दोनों काफी थक गए थे इसलिए थोड़े देर में सो गए।

मेरी यह कहानी जन्मदिन पर भाभी ने दिया चूत के साथ अपनी गाँड़ का तोहफ़ा कैसी लगी

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